एचएएल, एक जिम्मेदार पीएसयू के रूप में, एरोस्पेस उद्योग में एक महत्वपूर्ण वैश्विक प्रतिस्पर्धी बनने की दूरदृष्टि को साकार करने के प्रति प्रयासरत है तथा इसके साथ-साथ ही व्यापक रूप में पर्यावरण की सुरक्षा, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, कर्मचारियों एवं समाज कल्याण पर भी इसने अपना ध्यान केंद्रित किया है । एचएएल विगत वर्षों से विभिन्न पहलों के माध्यम से समुदाय विकास एवं पर्यावरण दोनों के प्रति अपनी जिम्मेदारी की भावना का प्रदर्शन कर रहा है, सामुदायिक वृद्धि एवं विकास को सक्रिय रूप से पोषित कर रहा है। पर्यावरण पर एचएएल के प्रचालनों के प्रभाव को कम करने हेतु पिछले कुछ वर्षों में कई पहल और उपाय किए गए हैं।
- कंपनी ने अपने सभी स्थानों पर वर्षा जल संचयन (आरडब्ल्यूएच) प्रणालियां स्थापित की हैं । उपयुक्त भवनों को पहचान कर वर्षा जल के संग्रहण एवं संचयन हेतु आरडब्ल्यूएच प्रणालियों को स्थापित किया है । संग्रहीत वर्षा जल का उपयोग बागवानी एवं गैर पेय जल संबंधी कार्यों में भी इसका उपयोग किया जाता है ।
- कंपनी रिसाव को रोकने, जागरूकता कार्यक्रमों आदि जैसे प्रभावी उपायों के माध्यम से जल संग्रहण को सक्रिय रूप से प्रोत्साहित करती है ।
- कंपनी यह सुनिश्चित करती है कि अपने प्रचालनों से पर्यावरण प्रदूषित न हो । मलजल एवं बहिस्राव उपचार संयंत्रों को संस्थापित किया जाता है तथा उपचारित जल बागवानी एवं गैर पेय जल संबंधी कार्यों में भी उपयोग किया जाता है कंपनी के सभी प्रचालन स्थानीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानदंडों का पूर्ण रूप से अनुपालन करते हैं ।
- वृक्षारोपण एक निरंतर कार्यकलाप है । बेंगलुरु, लखनऊ, हैदराबाद जैसे शहरों में स्थित कंपनी के कई प्रभाग कंक्रीट के जंगल में ऑक्सिजन स्रोत के रूप में अपना योगदान देते हैं ।
- सीएसआर के तहत, एचएएल ने एक गैर सरकारी संगठन इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर ह्यूमन वैल्यूज (आईएएचवी) के सहयोग से कर्नाटक राज्य के तुमकुर जिले में कुमुदावती नदी का कायाकल्प किया है । जल प्रतिधारण को बढ़ाने के लिए जलग्रहण क्षेत्र में करीब 25000 पौधे लगाए गए हैं । यह परियोजना वर्ष 2019 में पूरी हुई और इसे निम्नलिखित मान्यता और पुरस्कार प्राप्त हुए हैं :
एचएचआरडी द्वारा तीसरे कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी समिट में सर्वोत्कृष्ट सीएसआर प्रोजेक्ट
एबीपी न्यूज़ द्वारा बेस्ट एनवाइरमेंट फ्रेंडली प्रोजेक्ट
टॉप-20,”भारत में ब्लू इकोनॉमी प्रोजेक्ट्स” में चुना गया और स्कोच “ऑर्डर ऑफ मेरिट” प्राप्त किया
“वॉटर एंड सैनिटेशन कैटेगरी” के तहत रोटरी कर्नाटक सीएसआर अवार्ड्स 2019 के संयुक्त विजेता
एपेक्स इंडिया सीएसआर एक्सीलेंस अवार्ड्स 2018 द्वारा गोल्ड अवार्ड
वॉटर हार्वेस्टिंग कैटेगरी के तहत इकोनौर द्वारा ऑनलाइन सस्टेनेबिलिटी अवार्ड

एनएचआरडी द्वारा तीसरे कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व शिखर सम्मेलन में सर्वश्रेष्ठ सीएसआर परियोजना

एबीपी न्यूज द्वारा सर्वश्रेष्ठ पर्यावरण अनुकूल परियोजना।

शीर्ष-20 में से चुना गया, “भारत में ब्लू इकोनॉमी प्रोजेक्ट्स” और स्कोच “ऑर्डर ऑफ मेरिट” प्राप्त किया।

“जल और स्वच्छता श्रेणी” के तहत रोटरी कर्नाटक सीएसआर अवार्ड्स 2019 के संयुक्त विजेता

एपेक्स इंडिया सीएसआर एक्सीलेंस अवार्ड्स 2018 द्वारा गोल्ड अवार्ड।

जल संचयन श्रेणी के तहत इकोनॉर द्वारा ऑनलाइन सस्टेनेबिलिटी अवार्ड।
- ऊर्जा संरक्षण एचएएल के प्रचालनों में एक वर्तमान प्रयास है । एचएएल ने पिछले कुछ वर्षों में कई ऊर्जा संरक्षण संबंधी उपायों को कार्यान्वित किया है, जिसके परिणामस्वरूप प्रचालनों की ऊर्जा खपत में कम हुई है । इस संबंध में कुछ उदाहरण निम्नवत हैं :
- फर्नेस इंसुलेशन्स का नवीनीकरण
- एयर कम्प्रेसर, वेंटिलेशन सिस्टम आदि में वेरिएबल फ्रिक्वेंसी ड्राइव (वीएफडी) की प्रतिस्थापना
- सोलार वॉटर हीटर की प्रतिस्थापना
- एयर कंप्रेशर्स एवं हीटिंग, वेंटिलेशन एवं एयर कंडीशनिंग (एचवीएसी) संयंत्रों के प्रचालन में सुधार
- रेसिप्रोकेटिंग कंप्रेसर के स्थान पर स्क्रियू कंप्रेसर लगाना ।
- पुराने एयर कंडीशनरों के स्थान पर स्टार रेटेड एयर कंडीशनर लगाना ।
- एचएएल अपने सभी स्थानों पर पारंपरिक प्रकार की लाइट फिटिंग को एलईडी लाइट फिटिंग में बदलने के लिए प्रतिबद्ध है । यह कार्य वर्तमान में प्रगति पर है और लगभग 65% कवरेज प्राप्त कर ली गई है ।
- प्रचालनों में ऊर्जा दक्षता में सुधार के अलावा, एचएएल पारंपरिक संसाधनों से ऊर्जा की खपत में कमी पर निवेश करने के लिए भी प्रतिबद्ध है । कंपनी उत्सर्जित कार्बन की मात्रा को कम करने के लिए 50 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा बिजली संयंत्र स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है । लगभग 46 मेगावाट क्षमता के पवन एवं सौर विद्युत संयंत्र पहले ही प्रतिस्थापित किए जा चुके हैं । वर्ष 2019-20 के दौरान, कंपनी ने कैप्टिव उपयोग के लिए सौर एवं पवन ऊर्जा संयंत्रों से लगभग 775 लाख यूनिट बिजली उत्पन्न की है, जिससे लगभग 73000 टन CO2e समान उत्सर्जन से बचा जा रहा है ।
- वर्ष 2015-16 के दौरान, एचएएल एयरपोर्ट, बेंगलूरु में 3.5 मेगावाट के सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किया गया है । इस पावर प्लांट में एक सिंगल-एक्सिस मैकनिज़्म है, जो कि ऊर्जा निर्मिति को बढ़ाता है और एयरक्राफ़्ट के लैंडिंग के समय चमक से बचाता है । इसी तरह, 2018-19 के दौरान हमारे नासिक एवं कोरापुट प्रभाग में क्रमशः 15 मेगावाट और 6 मेगावाट क्षमता के ग्राउंड माउंटेड सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए गए हैं ।

- कर्नाटक के दावणगेरे जिले के हरपनहल्ली में स्थित 6.3 मेगावाट विंड पावर संयंत्र दिनांक 31 मार्च 2016 को शुरू किया गया था । बागलकोट जिले में इल्कल के पास एक और 8.4 एमडब्ल्यू पवन ऊर्जा संयंत्र स्थापित किया गया था और इसे दिनांक 11 दिसंबर, 2018 को शुरू किया गया था ।

- भारतभर में कंपनी के विभिन्न प्रभागों में भी रूफ टॉप सोलार पॉवर प्लांट लगवाए गए हैं । छतों पर 7 एमडब्ल्यूपी से अधिक की क्षमता स्थापित की गई है ।

- म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट (एमएसडी) मैनेजमेंट कार्यकलाप के भाग के रूप में बेंगलूरु स्थित सीनियर्स ऑफिसर्स क्वार्टर्स में ऑर्गेनिक वेस्ट कन्वर्टर्स (ओडब्ल्यूसी) की दो यूनिटें स्थापित की गई थीं । यह ओडब्ल्यूसी रसोईघर एवं अन्य जैव अपशिष्ट को बाग के खाद में परिवर्तित करता है । यह टाउनशिपों में शून्य अपशिष्ट निपटान की दिशा में एक पहल है ।

- ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की दिशा में एक अन्य पहल के रूप में, एचएएल, बेंगलूरु में सेंट्रल टेस्ट हाउस (सीटीएच) क्षेत्र में 500 किग्रा/प्रतिदिन एवं 1000 किग्रा/प्रतिदिन की क्षमता वाले बायोगैस संयंत्रों की दो इकाइयाँ स्थापित की गईं । इस प्लांट में कैंटीन के अपशिष्ट संसाधित की जाती है । इससे निर्मित बायोगैस का उपयोग खाना पकाने के लिए किया जा रहा है ।

- एचएएल के सभी स्थानों में प्रभावी रूप से अपशिष्ट के प्रबंधन हेतु स्रोत स्तर पर ही पृथक्करण को कार्यान्वित किया गया है ।
- एचएएल फाइल, फोल्डर एवं अन्य लेखन-सामग्री मदों को तैयार करने हेतु कार्यालयों से प्राप्त रद्दी कागज को संसाधित करने हेतु बेंगलूर में पेपर रि-साइक्लिंग यूनिट का भी प्रचालन करता है । यह संयंत्र 75 कि.ग्रा/प्रतिदिन रद्दी कागज को प्रासेस करने की क्षमता रखता है । पेड़ों के संरक्षण हेतु एचएएल द्वारा प्रारंभ की गई पहलों में एक है ।

- कंपनी समाज में अपशिष्ट प्रबंधन एवं स्वच्छ भारत के संबंध में जागरूकता बढ़ाने को भी बढ़ावा देती है । समाज के साथ जुड़ाव के कुछ तरीकों में स्कूलों में ड्राइंग एवं निबंध लेखन प्रतियोगिताएँ, नाटक, मिनी मैराथन आदि का आयोजन करना शामिल है । कंपनी का उच्च प्रबंधन इन अभियानों में सक्रिय रूप से सहभाग लेता है ।

- कंपनी ने अपशिष्ट को कम करने, पुनः उपयोग बनाने एवं रि-साइकिल के संबंध में किए गए प्रयासों के लिए राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद से प्रशस्ति पत्र प्राप्त किया है ।

