श्री अजय कुमार श्रीवास्तव को 15 जुलाई, 2025 से एचएएल में निदेशक (इंजीनियरिंग और अनुसंधान एवं विकास) के रूप में नियुक्त किया गया है । इस नियुक्ति से पहले, वे कार्यकारी निदेशक (एआरडीसी) के पद पर कार्यरत थे ।
इन्होंने एचबीटीआई कानपुर से इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में स्नातक और ईएनएसी/ईएनएसआईसीए, टूलूज़, फ्रांस से एमएस (एविएशन सेफ्टी एंड एयरक्राफ्ट एयरवर्दिनेस) में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की है । वे एक सर्टिफाइड प्रोजेक्ट मैनेजमेंट प्रोफेशनल भी हैं ।
इन्होंने जुलाई 1988 में हिन्दुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) में मैनेजमेंट ट्रेनी (टेक्निकल) के रूप में कार्यभार ग्रहण किया और प्रशिक्षण पूरा होने के बाद, जनवरी 1990 में वे एवियॉनिक्स प्रभाग, हैदराबाद में इंजीनियर के रूप में तैनात किए गए, जहाँ उन्होंने पृथ्वी मिसाइल की एवियॉनिक्स प्रणाली पर कार्य किया । इन्हें प्रशिक्षक, लड़ाकू और परिवहन विमानों के साथ-साथ रोटरी विंग एयरक्राफ़्ट के अभिकल्पन, विकास और प्रमाणन में 37 वर्षों का अनुभव है ।
परिवहन वायुयान अनुसंधान एवं अभिकल्प केंद्र (टीएआरडीसी), कानपुर में स्थानांतरित होने के बाद, इन्होंने विमान के नेविगेशन और संचार प्रणालियों, मौसम रेडार, ट्रांसपॉन्डर, रिकॉर्डर, एयरक्राफ्ट कोलीजन अवाइडेन्स सिस्टम आदि पर कार्य करना शुरू किया । इसके बाद वे नई उड़नयोग्यता संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए ग्राहकों की अपेक्षाओं, अप्रचलन प्रबंधन के अनुरूप समुद्री गश्ती रेडार, इलेक्ट्रो-ऑप्टिक्स और इंफ्रा-रेड सिस्टम, साइड लुकिंग एयरबोर्न रेडार,आईआर/यूवी सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक निगरानी उपाय, उपग्रह संचार प्रणाली, तैनाती योग्य एसएससीवीआर/एफडीआर सिस्टम, डेटा लिंक आदि जैसे अन्य एवियॉनिक्स प्रमुख भूमिका वाले उपकरणों और सेंसर के एकीकरण हेतु संशोधन विकसित करने में लग गए ।
इन्होंने भारतीय वायुसेना के संपूर्ण एचएस-748 बेड़े के एवियॉनिक्स उन्नयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसमें उस समय 56 विमान शामिल थे । इन्होंने भारतीय तटरक्षक बल, भारतीय वायुसेना और भारतीय नौसेना के डीओ-228, भारतीय नौसेना के सी-किंग हेलिकॉप्टर और भारतीय वायुसेना के आईएल-78 विमानों के एवियॉनिक्स उन्नयन की परियोजना भी प्रारंभ की ।
कानपुर स्थित परिवहन वायुयान अनुसंधान एवं अभिकल्प केंद्र (टीएआरडीसी) के प्रमुख के रूप में, इन्होंने हिन्दुस्तान-228 विमान को सफलतापूर्वक टाइप सर्टिफिकेशन दिलाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे यह भारत का पहला टाइप सर्टिफाइड स्वदेशी परिवहन नागरिक यात्री विमान बन गया । इन्होंने दो सिविल एचएएल डीओ-228 विमानों के लिए डीजीसीए प्रमाणन प्राप्त करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभायी ।
उनके नेतृत्व में, एचएएल परिवहन वायुयान प्रभाग, कानपुर ने आत्मनिर्भर भारत की आवश्यकताओं के अनुरूप कई महत्वपूर्ण विमान-घटकों का स्वदेशीकरण सफलतापूर्वक पूरा किया है । संगठन-व्यापी प्रणालीगत परिवर्तन, पारदर्शिता और प्रक्रिया सुधार लाने के लिए कई ई-पहल भी की गईं ।
एचएएल में एआरडीसी के प्रमुख के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान, इन्होंने एचटीटी-40 प्रशिक्षक विमान के लिए आरएमटीसी-आरएसडी प्रमाणन प्राप्त किया गया और एचजेटी-36 का एवियॉनिक्स उन्नयन किया गया, जिसका एरो इंडिया 2025 के दौरान सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया गया ।
वे संचार (रक्षा) परीक्षण फाउंडेशन (सेक्शन 8 कंपनी) के नामिती निदेशक हैं ।
कंपनी के किसी भी अन्य निदेशकों से इनका कोई संबंध नहीं हैं तथा कंपनी में इनकी कोई शेयरधारिता नहीं है ।
